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ऋग्वेद 29.2

शिप्रि॑न् वाजानां पते॒ शची॑व॒स्तव॑ दं॒सना॑ ।
आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥२॥

पूरा अध्याय