ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 2323.3ऋग्वेद 23.3इ॒न्द्र॒वा॒यू म॑नो॒जुवा॒ विप्रा॑ हवन्त ऊ॒तये॑ । स॒ह॒स्रा॒क्षा धि॒यस्पती॑ ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय