ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 2222.10ऋग्वेद 22.10आ ग्ना अ॑ग्न इ॒हाव॑से॒ होत्रां॑ यविष्ठ॒ भार॑तीम् । वरू॑त्रीं धि॒षणां॑ वह ॥१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय