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ऋग्वेद 191.4

नि गावो॑ गो॒ष्ठे अ॑सद॒न् नि मृ॒गासो॑ अविक्षत ।
नि के॒तवो॒ जना॑नां॒ न्य१दृष्टा॑ अलिप्सत ॥४॥

पूरा अध्याय