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ऋग्वेद 191.14

त्रिः स॒प्त म॑यू॒र्य॑ः स॒प्त स्वसा॑रो अ॒ग्रुव॑ः ।
तास्ते॑ वि॒षं वि ज॑भ्रिर उद॒कं कु॒म्भिनी॑रिव ॥१४॥

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