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ऋग्वेद 181.7

अस॑र्जि वां॒ स्थवि॑रा वेधसा॒ गीर्बा॒ळहे अ॑श्विना त्रे॒धा क्षर॑न्ती ।
उप॑स्तुताववतं॒ नाध॑मानं॒ याम॒न्नया॑मञ्छृणुतं॒ हवं॑ मे ॥७॥

पूरा अध्याय