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ऋग्वेद 179.1

पू॒र्वीर॒हं श॒रद॑ः शश्रमा॒णा दो॒षा वस्तो॑रु॒षसो॑ ज॒रय॑न्तीः ।
मि॒नाति॒ श्रियं॑ जरि॒मा त॒नूना॒मप्यू॒ नु पत्नी॒र्वृष॑णो जगम्युः ॥१॥

पूरा अध्याय