ऋग्वेद 178.2
न घा॒ राजेन्द्र॒ आ द॑भन्नो॒ या नु स्वसा॑रा कृ॒णव॑न्त॒ योनौ॑ ।
आप॑श्चिदस्मै सु॒तुका॑ अवेष॒न् गम॑न्न॒ इन्द्र॑ः स॒ख्या वय॑श्च ॥२॥
न घा॒ राजेन्द्र॒ आ द॑भन्नो॒ या नु स्वसा॑रा कृ॒णव॑न्त॒ योनौ॑ ।
आप॑श्चिदस्मै सु॒तुका॑ अवेष॒न् गम॑न्न॒ इन्द्र॑ः स॒ख्या वय॑श्च ॥२॥