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ऋग्वेद 169.7

प्रति॑ घो॒राणा॒मेता॑नाम॒यासां॑ म॒रुतां॑ शृण्व आय॒तामु॑प॒ब्दिः ।
ये मर्त्यं॑ पृतना॒यन्त॒मूमै॑र्ऋणा॒वानं॒ न प॒तय॑न्त॒ सर्गै॑ः ॥७॥

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