ऋग्वेद 165.2
कस्य॒ ब्रह्मा॑णि जुजुषु॒र्युवा॑न॒ः को अ॑ध्व॒रे म॒रुत॒ आ व॑वर्त ।
श्ये॒नाँ इ॑व॒ ध्रज॑तो अ॒न्तरि॑क्षे॒ केन॑ म॒हा मन॑सा रीरमाम ॥२॥
कस्य॒ ब्रह्मा॑णि जुजुषु॒र्युवा॑न॒ः को अ॑ध्व॒रे म॒रुत॒ आ व॑वर्त ।
श्ये॒नाँ इ॑व॒ ध्रज॑तो अ॒न्तरि॑क्षे॒ केन॑ म॒हा मन॑सा रीरमाम ॥२॥