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ऋग्वेद 165.13

को न्वत्र॑ मरुतो मामहे व॒ः प्र या॑तन॒ सखीँ॒रच्छा॑ सखायः ।
मन्मा॑नि चित्रा अपिवा॒तय॑न्त ए॒षां भू॑त॒ नवे॑दा म ऋ॒ताना॑म् ॥१३॥

पूरा अध्याय