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ऋग्वेद 164.48

७॥
द्वाद॑श प्र॒धय॑श्च॒क्रमेकं॒ त्रीणि॒ नभ्या॑नि॒ क उ॒ तच्चि॑केत ।
तस्मि॑न्त्सा॒ त्सा॒कं त्रि॑श॒ता न श॒ङ्कवो॑ ऽर्पि॒ताः ष॒ष्टिर्न च॑लाच॒लास॑ः ॥४॥

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