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ऋग्वेद 161.6

इन्द्रो॒ हरी॑ युयु॒जे अ॒श्विना॒ रथं॒ बृह॒स्पति॑र्वि॒श्वरू॑पा॒मुपा॑जत ।
ऋ॒भुर्विभ्वा॒ वाजो॑ दे॒वाँ अ॑गच्छत॒ स्वप॑सो य॒ज्ञियं॑ भा॒गमै॑तन ॥६॥

पूरा अध्याय