Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 151.4

प्र सा क्षि॒तिर॑सुर॒ या महि॑ प्रि॒य ऋता॑वानावृ॒तमा घो॑षथो बृ॒हत् ।
यु॒वं दि॒वो बृ॑ह॒तो दक्ष॑मा॒भुवं॒ गां न धु॒र्युप॑ युञ्जाथे अ॒पः ॥४॥

पूरा अध्याय