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ऋग्वेद 150.2

व्य॑नि॒नस्य॑ ध॒निन॑ः प्रहो॒षे चि॒दर॑रुषः । क॒दा च॒न प्र॒जिग॑तो॒ अदे॑वयोः ॥२॥

पूरा अध्याय