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ऋग्वेद 148.4

पु॒रूणि॑ द॒स्मो नि रि॑णाति॒ जम्भै॒राद् रो॑चते॒ वन॒ आ वि॒भावा॑ ।
आद॑स्य॒ वातो॒ अनु॑ वाति शो॒चिरस्तु॒र्न शर्या॑मस॒नामनु॒ द्यून् ॥४॥

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