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ऋग्वेद 140.2

अ॒भि द्वि॒जन्मा॑ त्रि॒वृदन्न॑मृज्यते संवत्स॒रे वा॑वृधे ज॒ग्धमी॒ पुन॑ः ।
अ॒न्यस्या॒सा जि॒ह्वया॒ जेन्यो॒ वृषा॒ न्य १न्येन॑ व॒निनो॑ मृष्ट वार॒णः ॥२॥

पूरा अध्याय