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ऋग्वेद 135.5

आ वां॒ धियो॑ ववृत्युरध्व॒राँ उपे॒ममिन्दुं॑ मर्मृजन्त वा॒जिन॑मा॒शुमत्यं॒ न वा॒जिन॑म् ।
तेषां॑ पिबतमस्म॒यू आ नो॑ गन्तमि॒होत्या ।
इन्द्र॑वायू सु॒ताना॒मद्रि॑भिर्यु॒वं मदा॑य वाजदा यु॒वम् ॥५॥

पूरा अध्याय