ऋग्वेद 129.9
त्वं न॑ इन्द्र रा॒या परी॑णसा या॒हि प॒थाँ अ॑ने॒हसा॑ पु॒रो या॑ह्यर॒क्षसा॑ ।
सच॑स्व नः परा॒क आ सच॑स्वास्तमी॒क आ ।
पा॒हि नो॑ दू॒रादा॒राद॒भिष्टि॑भि॒ः सदा॑ पाह्य॒भिष्टि॑भिः ॥९॥
त्वं न॑ इन्द्र रा॒या परी॑णसा या॒हि प॒थाँ अ॑ने॒हसा॑ पु॒रो या॑ह्यर॒क्षसा॑ ।
सच॑स्व नः परा॒क आ सच॑स्वास्तमी॒क आ ।
पा॒हि नो॑ दू॒रादा॒राद॒भिष्टि॑भि॒ः सदा॑ पाह्य॒भिष्टि॑भिः ॥९॥