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ऋग्वेद 127.10

प्र वो॑ म॒हे सह॑सा॒ सह॑स्वत उष॒र्बुधे॑ पशु॒षे नाग्नये॒ स्तोमो॑ बभूत्व॒ग्नये॑ ।
प्रति॒ यदीं॑ ह॒विष्मा॒न् विश्वा॑सु॒ क्षासु॒ जोगु॑वे ।
अग्रे॑ रे॒भो न ज॑रत ऋषू॒णां जूर्णि॒र्होत॑ ऋषू॒णाम् ॥१०॥

पूरा अध्याय