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ऋग्वेद 121.7

स्वि॒ध्मा यद् व॒नधि॑तिरप॒स्यात् सूरो॑ अध्व॒रे परि॒ रोध॑ना॒ गोः ।
यद्ध॑ प्र॒भासि॒ कृत्व्याँ॒ अनु॒ द्यूनन॑र्विशे प॒श्विषे॑ तु॒राय॑ ॥७॥

पूरा अध्याय