Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 118.5

आ वां॒ रथं॑ युव॒तिस्ति॑ष्ठ॒दत्र॑ जु॒ष्ट्वी न॑रा दुहि॒ता सूर्य॑स्य ।
परि॑ वा॒मश्वा॒ वपु॑षः पतं॒गा वयो॑ वहन्त्वरु॒षा अ॒भीके॑ ॥५॥

पूरा अध्याय