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ऋग्वेद 106.6

इन्द्रं॒ कुत्सो॑ वृत्र॒हणं॒ शची॒पतिं॑ का॒टे निबा॑ह्ल॒ ऋषि॑रह्वदू॒तये॑ ।
रथं॒ न दु॒र्गाद् व॑सवः सुदानवो॒ विश्व॑स्मान्नो॒ अंह॑सो॒ निष्पि॑पर्तन ॥६॥

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