Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 105.2

अर्थ॒मिद् वा उ॑ अ॒र्थिन॒ आ जा॒या यु॑वते॒ पति॑म् ।
तु॒ञ्जाते॒ वृष्ण्यं॒ पय॑ः परि॒दाय॒ रसं॑ दुहे वि॒त्तं मे॑ अ॒स्य रो॑दसी ॥२॥

पूरा अध्याय