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ऋग्वेद 104.6

स त्वं न॑ इन्द्र॒ सूर्ये॒ सो अ॒प्स्व॑नागा॒स्त्व आ भ॑ज जीवशं॒से ।
मान्त॑रां॒ भुज॒मा री॑रिषो न॒ः श्रद्धि॑तं ते मह॒त इ॑न्द्रि॒याय॑ ॥६॥

पूरा अध्याय