ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 1010.11ऋग्वेद 10.11आ तू न॑ इन्द्र कौशिक मन्दसा॒नः सु॒तं पि॑ब। नव्य॒मायु॒ः प्र सू ति॑र कृ॒धी स॑हस्र॒सामृषि॑म् ॥११॥पिछलाअगलापूरा अध्याय