ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 9999.3श्रीरामचरितमानस 99.3जे अपकारी चार तिन्ह कर गौरव मान्य तेइ। मन क्रम बचन लबार तेइ बकता कलिकाल महुँ ॥98(ख)॥पिछलापूरा अध्याय