ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 9696.3श्रीरामचरितमानस 96.3पाट कीट तें होइ तेहि तें पाटंबर रुचिर। कृमि पालइ सबु कोइ परम अपावन प्रान सम ॥95(ख)॥पिछलापूरा अध्याय