ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 9595.2श्रीरामचरितमानस 95.2तुम्हहि न ब्यापत काल अति कराल कारन कवन। मोहि सो कहहु कृपाल ग्यान प्रभाव कि जोग बल ॥94(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय