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श्रीरामचरितमानस 9.2

कौसल्या के चरनन्हि पुनि तिन्ह नायउ माथ।।
आसिष दीन्हे हरषि तुम्ह प्रिय मम जिमि रघुनाथ ॥8(क)॥

पूरा अध्याय