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श्रीरामचरितमानस 89.3

सोइ सुख लवलेस जिन्ह बारक सपनेहुँ लहेउ।
ते नहिं गनहिं खगेस ब्रह्मसुखहि सज्जन सुमति ॥88(ख)॥

पूरा अध्याय