ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 8686.2श्रीरामचरितमानस 86.2माया संभव भ्रम सब अब न ब्यापिहहिं तोहि। जानेसु ब्रह्म अनादि अज अगुन गुनाकर मोहि ॥85(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय