Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 75.3

तिमि रघुपति निज दासकर हरहिं मान हित लागि।
तुलसिदास ऐसे प्रभुहि कस न भजहु भ्रम त्यागि ॥74(ख)॥

पूरा अध्याय