ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 7272.3श्रीरामचरितमानस 72.3सो दासी रघुबीर कै समुझें मिथ्या सोपि। छूट न राम कृपा बिनु नाथ कहउँ पद रोपि ॥71(ख)॥पिछलापूरा अध्याय