ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 6363.3श्रीरामचरितमानस 63.3सिव बिरंचि कहुँ मोहइ को है बपुरा आन। अस जियँ जानि भजहिं मुनि माया पति भगवान ॥62(ख)॥पिछलापूरा अध्याय