ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 66.4श्रीरामचरितमानस 6.4पुनि प्रभु हरषि सत्रुहन भेंटे हृदयँ लगाइ। लछिमन भरत मिले तब परम प्रेम दोउ भाइ ॥5॥पिछलापूरा अध्याय