ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 5757.2श्रीरामचरितमानस 57.2-सीतल अमल मधुर जल जलज बिपुल बहुरंग। कूजत कल रव हंस गन गुंजत मजुंल भृंग ॥56॥पिछलापूरा अध्याय