ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 5454.2श्रीरामचरितमानस 54.2बिरति ग्यान बिग्यान दृढ़ राम चरन अति नेह। बायस तन रघुपति भगति मोहि परम संदेह ॥53॥पिछलापूरा अध्याय