ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 5353.2श्रीरामचरितमानस 53.2तुम्हरी कृपाँ कृपायतन अब कृतकृत्य न मोह। जानेउँ राम प्रताप प्रभु चिदानंद संदोह ॥52(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय