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श्रीरामचरितमानस 5.3

उतरि कहेउ प्रभु पुष्पकहि तुम्ह कुबेर पहिं जाहु।
प्रेरित राम चलेउ सो हरषु बिरहु अति ताहु ॥4(ख)॥

पूरा अध्याय