ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 4646.2श्रीरामचरितमानस 46.2औरउ एक गुपुत मत सबहि कहउँ कर जोरि। संकर भजन बिना नर भगति न पावइ मोरि ॥45॥पिछलापूरा अध्याय