ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 4444.2श्रीरामचरितमानस 44.2सो परत्र दुख पावइ सिर धुनि धुनि पछिताइ। कालहि कर्महि ईस्वरहि मिथ्या दोष लगाइ ॥43॥पिछलापूरा अध्याय