Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 4.3

बहुतक चढ़ी अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान।
देखि मधुर सुर हरषित करहिं सुमंगल गान ॥3(ख)॥

पूरा अध्याय