ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 33.4श्रीरामचरितमानस 3.4भरत चरन सिरु नाइ तुरित गयउ कपि राम पहिं। कही कुसल सब जाइ हरषि चलेउ प्रभु जान चढ़ि ॥2(ख)॥पिछलापूरा अध्याय