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श्रीरामचरितमानस 3.4

भरत चरन सिरु नाइ तुरित गयउ कपि राम पहिं।
कही कुसल सब जाइ हरषि चलेउ प्रभु जान चढ़ि ॥2(ख)॥

पूरा अध्याय