ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 2929.3श्रीरामचरितमानस 29.3उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर। बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर ॥28॥पिछलापूरा अध्याय