ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 2828.3श्रीरामचरितमानस 28.3चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे बनाइ। राम चरित जे निरख मुनि ते मन लेहिं चोराइ ॥27॥पिछलापूरा अध्याय