ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1515.1श्रीरामचरितमानस 15.1जय राम रमारमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं।। अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो ॥1॥अगलापूरा अध्याय