ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 129129.2श्रीरामचरितमानस 129.2राम चरन रति जो चह अथवा पद निर्बान। भाव सहित सो यह कथा करउ श्रवन पुट पान ॥128॥पिछलापूरा अध्याय