ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 127127.2श्रीरामचरितमानस 127.2मुनि दुर्लभ हरि भगति नर पावहिं बिनहिं प्रयास। जे यह कथा निरंतर सुनहिं मानि बिस्वास ॥126॥पिछलापूरा अध्याय