ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 122122.3श्रीरामचरितमानस 122.3नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य जप दान। भेषज पुनि कोटिन्ह नहिं रोग जाहिं हरिजान ॥121(ख)॥पिछलापूरा अध्याय